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चादर पलट कर देखा तो करवटें उड़ गईं
आज माँ के चेहरे से सलवटें उड़ गईं ।
एक चटनी वो खट्टी सी माँ के हाथों की , (और)
शाही दस्तरख़ानों की लज़्ज़तें उड़ गईं ।

जब जब ख़याल ये आया , ‘चलो हथियार डाल भी दें अब’ ,
माँ ने नज़र उतार दी और दिक्कतें उड़ गईं ।

बड़ी शिकायतें थीं मुझको माँ से , कई कड़वाहटें पनपती थीं ,
एक थप्पड़ उसने लगाया और नफ़रतें उड़ गईं ।

कोई क़र्ज़ माँ का ,मै खुद पर मानता ही नहीं ,
क़र्ज़ उतारने जो निकल पड़ा , तो समझो बरकतें उड़ गईं ।

कल ऊँगली पकड़ कर चलना सीखा था इन्हीं ने ,
आज ऊँगली छोड़ क्या आये , सब कुव्वतें उड़ गईं ।

खुद के सहारे चलना भी आ ही गया आखिर ,
कदम बढ़ तो गए मगर आहटें उड़ गईं ।

सुना है उस शख़्स ने कभी माँ को नहीं देखा ,
सुना है उस शख़्स की सभी हसरतें उड़ गईं ।

ख्वाब में एक रोज़ माँ को जाते हुए देखा था ,
उस रोज़ ही मेरी बचकानी हरकतें उड़ गईं ।

© 2017, The Null. All rights reserved.

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2 thoughts on “करवटें

  1. is duniya ka sabse anmol rishta hai tu
    ae maa, mere liye khuda ka bheja gaya farista hai tu
    bas chale mera, toh tere aanchal ki chaav me apni puri jindagi bita du
    ma tere liye yeh jaha kya , khuda ko bhi bhula du

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