मुनासिब है तुम भी अपना खज़ाना छिपा लो
तुमने करते नहीं देखा फ़रियाद मुझे

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चादर पलट कर देखा तो करवटें उड़ गईं
आज माँ के चेहरे से सलवटें उड़ गईं ।
एक चटनी वो खट्टी सी माँ के हाथों की , (और)
शाही दस्तरख़ानों की लज़्ज़तें उड़ गईं ।