Sang-e-marmar

Categories creative writing, hindi, poetry

-N

ख़ैरात में देकर चाँद अल्फ़ाज़ मुझे
तुम चल दिए कर के आज़ाद मुझे
है मुहब्बत उन बेड़ियों से मुझको भी
वो ज़ंजीरें भी करती हैं याद मुझे

तुम्हारी हुकूमत में ज़रूर अशर्फियाँ लुटती होंगी
मेरी सल्तनत में मिलती है दाद मुझे

एक आंसू ने बिलखते अपना क़िस्सा कहा-
“किसी खुदगर्ज़ ने कर दिया ईजाद मुझे”

मुनासिब है तुम भी अपना खज़ाना छिपा लो
तुमने करते नहीं देखा फ़रियाद मुझे

मेरे लहज़े में नुक्स बेशुमार निकल पड़ते हैं
मेरी खामोशी ने ही किया है आबाद मुझे

मेरे मक़बरे की ईंटों से क़िला अपना बनवा लो
मगर संग-ए-मरमर की चाहिए बुनियाद मुझे।

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